बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को मुंबई तट के पास जब्त तीन पोत पर फंसे 50 नाविकों को रिहा करने का निर्देश दिया। अदालत ने क्रू सदस्यों को कम खाना और पानी देने की बात पर पोत मालिकों को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि पोत मालिकों ने उनके (क्रू) के साथ ‘पालतू जानवरों’ से भी बुरा बर्ताव किया। दरअसल, शहर से लगभग 11 नॉटिकल मील दूर, समुद्र के बीच में अवैध रूप से ईंधन तेल की हेरा-फेरी के आरोप में तीन पोत एमटी एस्फाल्ट स्टार, एमटी स्टेलर रूबी और एमटी अल जाफजिया जब्त किए गए थे। इन पोत में कुल 50 नाविक फंसे हुए थे।
"उनमें से सात ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका के साथ हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने सोमवार को येलो गेट पुलिस को आदेश दिया कि मंगलवार को सभी 50 नाविकों को पेश किया जाए।जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की पीठ के समक्ष आज सभी नाविकों को पेश किया गया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनमें से कोई भी अपने पोतों पर वापस नहीं जाना चाहता, क्योंकि उन्हें वहां गलत तरीके से रोककर रखा गया था। वे पोतों पर बहुत कम खाने-पानी के साथ गुजारा कर रहे थे और उन्हें हर दिन सिर्फ 300 एमएल पानी दिया जाता था। अदालत ने पोत मालिकों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें इंसानी जिंदगी में जरा भी दिलचस्पी नहीं है, उन्हें सिर्फ अपने पोतों और व्यापारिक कामों की फिक्र है। अदालत ने आगे कहा कि आप (मालिक) क्रू सदस्यों को हर दिन सिर्फ 300 एमएल पानी कैसे दे सकते हैं? हमारे घरों में पालतू जानवरों को भी हर दिन इससे ज्यादा पानी मिलता है। हम इंसानी जिंदगी के साथ इस तरह का बर्ताव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिंदगी सिर्फ एक बार मिलती है। हम पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते। इसके बाद पीठ ने येलो गेट पुलिस को निर्देश दिया कि वे सभी 50 नाविकों को रिहा कर दें।
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